Thursday, September 13, 2012

जाने तश्वीर थी कैसी



जाने  तश्वीर  थी  कैसी  ,दीवारों  में  हुई  हलचल ,
दीवान  में  सोये  थे  किरदारों  में  हुई  हलचल  !

जाने  खाख  होता  गया  पन्ना  वो  कैसा  था ,
कि  जौक -ए -धुंए  से  आज  चराग़ों  में  हुई  हलचल   !

उस  फूल  की  ख्वाइश  थी  पतझड़  में  भी  खिलने  की ,
सुन  मासूम   सी  ये  आह   ,बहारों  में  हुई  हलचल  !

बादल  छंटा   ,लोगों  ने  ढूंढा  किया  महताब 
क्यूँ  नाराज़  थे  इससे , सितारों   में  हुई  हलचल  !

दे  गया    नील  आँखों  में  ये  कैसा  ख्वाब ,
उस  ख्वाब  से  काग़ज़  की  राहों   में  हुई  हलचल 

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