Tuesday, July 10, 2012

राह में टूटा हुआ पत्ता मिला





राह  में  टूटा  हुआ   पत्ता  मिला ,
कई  साँस  दे  गया  था  लिखा  मिला 

वो अन्दर से बिखरा हुआ था दोस्तों 
आज फिर से वो मुझे हँसता मिला 

देखा किया नहीं मिली कोई खनक
तकता  हुआ  चाँद का सिक्का मिला 

दे गया लोहा कोई वो रहगुज़र
जो ज़मीर के अलाव में  तपता मिला 

ज़िन्दगी जियेंगे न कि बिताएंगे 
जिंदगानी से बस यही नुख्ता मिला 

एक दुसरे के लिए ही वो मिट जायेंगे
काग़ज़ कलम का समझौता मिला 

आपकी सीरत ने बना दी इक सड़क 
रब तक पहुँचने का इक रास्ता मिला 

वो लिख रहा था नदी जैसी ग़ज़ल 
जो नील आँखों में ही बहता  मिला 




Saturday, July 7, 2012

ले चलो

मेरे ख्वाब मुझे दूर बहुत दूर ले चलो ,
जहाँ "मैं " न रहे कहीं ,ओ ! हुज़ूर ले चलो 

या बना दो इक तश्वीर ,बसा दो इक शहर 
तुम मेरे रंग और काग़ज़ बदस्तूर ले चलो 

तुम जाना लहर में बिन नाव , लेकिन मेरे अज़ीज़
अपने साथ मेरी दुआयें भरपूर ले चलो

तुम मेरे गुरूर को फ़ना कर दो मगर सुन लो
मेरे घर में है रब का ज़रा सा नूर , ले चलो

नीम और मधु में कोई भेद क्या हो "नील "
है हर चरागारी हमें मंज़ूर ,ले चलो