Tuesday, May 10, 2011

कलम !


कलम !

ठहरी ,
अर्थहीन स्याह में
लाती
ये मेरे मन के तरंगो की रवानी है !

हर पन्ने पर
ये चलती है ,
इसे मुझको राह दिखानी है ,
ये लिखती मेरी कहानी है!

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